अफसर ट्रांसफर-पोस्टिंग मामलाः सुप्रीम कोर्ट 8 दिसंबर से करेगा सुनवाई

कोर्ट यह सुनिश्चित करे कि अगली तारीख को होने वाली सुनवाई को आगे ना टाला जाए।

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नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट दिल्ली में अफसरों की ट्रांसफर-पोस्टिंग के मामले पर अब 8 दिसंबर से सुनवाई करेगा। केंद्र सरकार की ओर से गुरुवार को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने मामले को उठाते हुए कहा कि 24 नवंबर से बेंच नोटबंदी के मामले पर सुनवाई कर रही है। इस वजह से इस मामले की सुनवाई की तारीख को आगे बढ़ा दिया जाए।

वहीं, दिल्ली सरकार की तरफ से वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि इस मामले में पहले ही कितनी बार सुनवाई टाला जा चुका है, इसलिए कोर्ट यह सुनिश्चित करे कि अगली तारीख को होने वाली सुनवाई को आगे ना टाला जाए।

दरअसल, 11 नवंबर को चीफ जस्टिस ने कहा था कि संविधान बेंच दिल्ली और केंद्र के बीच सेवाओं के विवादों से संबंधित संवैधानिक मुद्दा तय करेगा, जिस पर सुनवाई 24 नवंबर को तय की थी।
इस मामले में मनीष सिसोदिया ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा है कि इस साल की शुरुआत में उप-राज्यपाल वीके सक्सेना की नियुक्ति के साथ समस्या और भी विकट हो गई है। वे दिल्ली सरकार के काम-काम को पूरे तरीके से बाधित कर रहे हैं।

हलफनामे में कहा गया है कि मंत्रियों के फोन करने के बावजूद नौकरशाहों ने बैठकों में भाग लेना बंद कर दिया। इतना ही नहीं, अधिकारियों ने मंत्रियों के फोन उठाने बंद कर दिए। अधिकारी या तो देरी करते थे या मंत्रियों के विभागों तक फ़ाइल नहीं भेजते थे।

अधिकारियों ने मंत्रियों के आदेशों और निर्देशों की भी अवहेलना की और चुनी हुई सरकार के साथ उदासीनता के साथ व्यवहार किया। दिल्ली सरकार का कहना है कि इस साल की शुरुआत में उप राज्यपाल वीके सक्सेना की नियुक्ति के साथ समस्या और भी विकट हो गई है। उप-राज्यपाल उन अफसरों को दंडित कर रहे हैं जो चुनी हुई सरकार के साथ सहयोग कर रहे हैं।

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उल्लेखनीय है कि 6 मई को कोर्ट ने इस मामले को 5 जजों की संविधान बेंच को रेफर कर दिया था। दिल्ली सरकार अधिकारियों पर पूर्ण नियंत्रण की मांग कर रही है।

इस मामले पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा था कि यह मसला 2021 में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली अधिनियम में हुए संशोधन से भी जुड़ा है। केंद्र ने दोनों मसलों पर साथ सुनवाई करने की मांग की थी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मामले को संविधान पीठ को सुनवाई के लिए रेफर करने की मांग की थी।

आपक बता दें कि 14 फरवरी 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में अफसरों पर नियंत्रण के मसले पर सुप्रीम कोर्ट की 2 सदस्यीय बेंच ने विभाजित फैसला सुनाया था। जस्टिस एके सिकरी और जस्टिस अशोक भूषण की बेंच ने अलग-अलग फैसला सुनाया था इसलिए इस मसले पर विचार करने के लिए बड़ी बेंच को रेफर कर दिया गया।