झारखंड के आधा दर्जन बीजेपी सांसदों के टिकट कटने की संभावना

बीजेपी के लिए साल 2024 का लोकसभा चुनाव प्रतिष्ठा का विषय

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रांची (विशेष संवाददाता) : झारखंड के मौसम में नरमी आते ही सियासी पारा गर्मी का कारण लोकसभा चुनाव 2024 को माना जा रहा है। साल 2024 का लोकसभा चुनाव बीजेपी और प्रधानमंत्री के लिए प्रतिष्ठा का विषय बना हुआ है। सूत्रों पर भरोसा करें तो प्रतिष्ठा बचाने के लिए बीजेपी एक सर्वे करवाई है, जिसमें झारखंड के आधे दर्जन सांसद बेटिकट हो रहे हैं।

बीजेपी के अंदरखाने की बात को माने तो पार्टी ने देशभर में सर्वे करवाया है, जिसमें झारखंड सहित कई प्रदेशों के सांसद अपनी लोकप्रियता जनता के बीच खोते नजर आ रहे हैं। सांसदों की घटती लोकप्रियता को देखते हुए पार्टी उन्हें इस बार बेटिकट करने का मन बनाया है। वैसे भी भारत की आजादी के बाद अभी तक कोई भी प्रधानमंत्री लगातार तीसरी बार कुर्सी हासिल नहीं किया है। अति महत्वकांक्षी बीजेपी प्रधानमंत्री की कुर्सी पर तीसरी बार कब्जा जमाये रखना चाहती है।

आपको बता दें कि झारखंड में लोकसभा के 14 सीट है, राज्यसभा के छह और विधानसभा के 81, लोकसभा के 14 सीटों में से 12 पर कब्जा बीजेपी का है। सूत्र कहते हैं चतरा, हजारीबाग, धनबाद, गिरीडीह, पलामू के बीजेपी सांसदों का ग्राफ जनता के बीच काफी गिरा है। ये सांसद जनता के बीच कम रहते हैं तो किसी का उम्र ज्यादा हो गया है।

धनबाद संसदीय सीट बीजेपी के कब्जे में है। यहां दो बार से नेतृत्व पशुपति नाथ सिंह कर रहे हैं। बीजेपी के नियमानुसार 75 पार को पार्टी टिकट नहीं देती। इसी कडी में रांची सांसद रामटहल चौधरी और खूंटी सांसद कडिया मुंडा का टिकट साल 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने टिकट काटी थी। धनबाद सांसद पशुपति नाथ सिंह की उम्र 75 से ज्यादा हो गयी है। इसलिए उम्र का हवाला देकर श्री सिंह को रोका जा सकता है।

हजारीबाग संसदीय सीट से जयंत सिन्हा हैं जो पूर्व केंद्रीय मंत्री और हाल में संपन्न हुए राष्ट्रपति पद के लिए हुए चुनाव में विपक्ष की ओर से उम्मीदवार यशवंत सिन्हा के पुत्र हैं। यशवंत सिन्हा केन्द्र की मोदी सरकार के विरोध में हमेशा कुछ न कुछ बोलते रहते हैं, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं के अलावा वरिष्ठ नेताओं को जवाब देने में नहीं बनता। सूत्रों की माने तो पिता के कारण पुत्र का टिकट इस बार जय श्री राम हो जायेगा।

चतरा संसदीय सीट से भी बीजेपी के सुनील सिंह दो बार से सांसद हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में भी इनकी टिकट कटने का हल्ला था। लेकिन श्री सिंह टिकट पाने में सफल रहे और चुनाव जीत भी गए। साल 2019 के चुनाव में श्री सिंह बीजेपी का टिकट पा लिए, लेकिन इन्हें जनता के कोपभाजन का शिकार होना पड़ा था। श्री सिंह की तमाम सभाओं में सुनील सिंह वापस जाओ के नारे लगे। चतरा की जनता का विरोध देखकर पार्टी की प्रदेश ईकाई ने चुनाव प्रचार का कमान संभाला तब वहां से बीजेपी की लाज बची।

बीजेपी  सर्वे सूत्र के अनुसार श्री सिंह का ग्राफ पिछली बार की तरह इसबर और नीचे ही गिरा है। इसलिए पार्टी इन्हें भी पैदल करने के फिराक में है। पलामू संसदीय सीट भी बीजेपी के पाले में है। यहां से भी बीडी राम दो बार से सांसद हैं। श्री राम राज्य के पुलिस मुखिया रह चुके हैं। प्रदेश पुलिस मुखिया पद से अवकाश ग्रहण करने के बाद बीजेपी ने सीधे श्री राम को पलामू संसदीय चुनाव में उतार दिया। पलामू की जनता ने श्री राम को हाथों हाथ लोका और आईपीएस पद जाने के बाद सांसद बना दिया।

पहली पारी श्री राम अच्छा खेले तो पार्टी ने साल 2019 की चुनाव में दोबारा दांव पर लगा दिया। श्री राम फिर पार्टी के भरोसा पर खरा उतरे और भरी मतों से जीत हासिल किया। लेकिन हाल के दिनों में सांसद बीडी राम की पकड़ पलामू पर धीमी पड़ती नजर आ रही है। जनता से श्री राम दूर हो गए हैं। कोरोना काल में भी श्री राम जनता के बीच रहना पसंद नहीं किए और दिल्ली में डेरा डाले रहे।

जबकि पलामू एक गरीब संसदीय क्षेत्र में आता है। जनता के नाराजगी का कारण बीजेपी सर्वे में भी है और पार्टी केंद्रीय नेतृत्व को पता भी है। इन कारणों से 2024 में श्री राम का भी टिकट कटने की संभावना है। गिरिडीह संसदीय सीट से आजसू के चंद्रप्रकाश चौधरी हैं। यह सीट गठबंधन के तहत बीजेपी ने आजसू को दी थी। लेकिन साल 2024 में इस सीट को बीजेपी अपने पास रखना चाहती है। इस सीट के प्रबल दावेदार रवींद्र पांडेय हैं जो दो-दो बार इस क्षेत्र से नेतृत्व कर चुके हैं।

बहरहाल बीजेपी प्रत्येक संसदीय सीट पर वर्तमान सांसद और साफ छवि वाले उम्मीदवारों के बारे में पहला सर्वे करवा चुकी है, जिसमें बीजेपी के आधे दर्जन से अधिक सांसद बेटिकट होने की संभावना है।