Turkey Earthquake: तुर्की में भूकंप से तबाही ! मौतों का आंकड़ा 4 हजार के पार
भीषण भूकंप के बाद भारी जानमाल का नुकसान हुआ है।
नई दिल्ली । तुर्की में 7.8 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप (Devastating Earthquake) के बाद हर तरफ चीख और पुकार मची है। भीषण भूकंप के बाद भारी जानमाल का नुकसान हुआ है।
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सैकड़ों घर और परिवार तबाह हो गए हैं। हर तरफ मलबा बिखरा पड़ा है। भूकंप से तुर्की (Turkey) और सीरिया (Syria) में 5000 से ज्यादा लोगों की जान चली गई है। बड़ी आपदा के बाद तुर्किए के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने देश में 7 दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है। राहत और बचाव का काम जारी है। वहीं मृतकों की संख्या अभी और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
तुर्किए में भूकंप से बड़ी तबाही
भूकंप से मची तबाही के बीच तुर्किए में फिर भूकंप का बड़ा झटका महसूस हुआ है। रिक्टर स्केल पर 5.9 तीव्रता मापी गई। तुर्किए में इस बार अभी तक कुल 145 से अधिक बार भूकंप के झटके महसूस किए हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी थी कि झटके दिनों या हफ्तों तक जारी रह सकते हैं। डेनमार्क के भूवैज्ञानिक संस्थान ने कहा कि भूकंप के झटके ग्रीनलैंड तक महसूस किए गए। एक आंकड़े के मुताबिक भीषण भूकंप में कुल 5600 से अधिक इमारतें धाराशाई हो गईं और हजारों परिवार बेघर हो गए हैं। मरने वालों का आंकड़ा धीरे-धीरे बढ़ता ही जा रहा है।
भूकंप इतना घातक क्यों था?
तुर्किए में जमीन के ऊपर तबाही है और धरती के अंदर तूफान मचा है। कर्टिन यूनिवर्सिटी के एल्डर्स ने कहा कि भूकंप की गहराई लगभग 18 किमी (11 मील) गहरी थी, जिसने इस घटना को विशेष रूप से विनाशकारी बना दिया। भूकंप से बनी ऊर्जा सतह के काफी करीब महसूस की गई है। इस डिस्टर्बेंस के बाद विनाशकारी भूकंप आया।
फिलीपीन इंस्टीट्यूट ऑफ वोल्केनोलॉजी एंड सीस्मोलॉजी के डायरेक्टर रेनाटो सॉलिडम के मुताबिक 7 तीव्रता वाले भूकंप से हिरोशिमा में हुए न्यूक्लियर अटैक में निकलने वाली एनर्जी से करीब 32 गुना अधिक ऊर्जा निकलती है। भूकंप की वजह से होने वाला नुकसान दो कारकों पर निर्भर है- पहला जनघनत्व और दूसरा भूकंप का केंद्र धरती के कितना नीचे रहा।
आइए जाने तुर्की की जियोलॉजिकल स्थिति क्या है?
जियोलॉजिकल स्थिति की वजह से तुर्की दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंप क्षेत्रों में शामिल है। तुर्की मुख्य रूप से एनाटोलियन टैक्टोनिक प्लेट पर स्थित है। दरअसल धरती बड़ी-बड़ी टैक्टोनिक प्लेट्स पर स्थित है। ये प्लेट्स कई बार आपस में टकरा जाती हैं। अधिक दबाव होने पर कई बार ये प्लेट्स टूटने लगती हैं। इस दौरान भारी मात्रा में ऊर्जा निकलती है और बाहर जाने का रास्ता खोजने लगती है। इस दौरान डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप की स्थिति बनती है।
जाने क्या है अफ्रीकन और अरेबियन प्लेट्स
तुर्की का अधिकतर भाग एनाटोलियन टैक्टोनिक प्लेट पर स्थित है। ये प्लेट यूरोशियन, अफ्रीकन और अरेबियन प्लेट्स के बीच में फंसी हुई है। वैज्ञानिकों के मुताबिक जब अफ्रीकन और अरेबियन प्लेट शिफ्ट होती हैं तो तुर्की के लिए मुश्किलें खड़ी हो जाती हैं। धरती के अंदर बेहद ही अधिक मात्रा में ऊर्जा निकलती है और भूकंप के तेज झटके महसूस किए जाते हैं। भू-वैज्ञानिकों के मुताबिक जब टैक्टोनिक प्लेट्स टकराती हैं तो कई परमाणु बम के बराबर एनर्जी निकलती है और फिर बड़ी तबाही मचती है।