राष्ट्रीय एकता दिवस पर बीएसएफ ने कोलकाता में 10 किलोमीटर लंबे वाकाथन का किया आयोजन

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कोलकाताः  लौह पुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल (Sardar Vallabhai Patel) की जयंती यानी राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर सोमवार को सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के दक्षिण बंगाल सीमांत मुख्यालय की ओर से कोलकाता में 10 किलोमीटर लंबे वाकाथन (रन फार यूनिटी दौड़) का आयोजन किया गया।

इसमें जवानों और अधिकारियों ने बढ़- चढ़कर हिसा  लिया। सीमांत मुख्यालय,  राजारहाट से सुबह करीब 6:30 शुरू हुए, इस वाकाथन को दक्षिण बंगाल सीमांत के महानिरीक्षक (आइजी) डा. अतुल फुलझेले, आइपीएस ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

इस वाकाथन में सीमा सुरक्षा बल के वरिष्ठ अधिकारियों, जवानों, उनके परिवारों और बच्चों ने बड़े उत्साह के साथ भाग लिया। इसके जरिए सीमा प्रहरियों ने लोगों के बीच राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया। वापस राजारहाट में सीमांत मुख्यालय परिसर में आकर इस वाकाथन का समापन हुआ।

इसके बाद ‘राष्ट्रीय एकता दिवस’  के रूप में शपथ समारोह का आयोजन हुआ। इसमें दक्षिण बंगाल सीमांत मुख्यालय और उसके अंतर्गत क्षेत्रीय मुख्यालयों तथा सभी वाहिनियों के कार्मिकों ने एक साथ राष्ट्रीय एकता के लिए शपथ ली।

बीएसएफ के आइजी

ने सभी कार्मिकों को शपथ दिलाई। बीएसएफ की ओर से एक बयान में बताया गया कि इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य स्थानीय लोगों को राष्ट्रीय एकता के महत्व एवं देश की एकता और अखंडता के लिए सरदार बल्लभ भाई पटेल के योगदान से अवगत कराना था।दरअसल, देश के प्रथम गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल की आजादी के बाद नए स्वतंत्र देश में राष्ट्रीय एकता के प्रति प्रतिबद्धता संपूर्ण और अडिग थी, जिससे उन्हें भारत का लौह पुरुष कहा जाता है।

इसके बाद ‘राष्ट्रीय एकता दिवस’ के रूप में शपथ समारोह का आयोजन हुआ। इसमें दक्षिण बंगाल सीमांत मुख्यालय और उसके अंतर्गत क्षेत्रीय मुख्यालयों तथा सभी वाहिनियों के कार्मिकों ने एक साथ राष्ट्रीय एकता के लिए शपथ ली।

बीएसएफ आइजी डा. फुलझेले ने सभी कार्मिकों को शपथ दिलाई। बीएसएफ की ओर से एक बयान में बताया गया कि इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य स्थानीय लोगों को राष्ट्रीय एकता के महत्व एवं देश की एकता और अखंडता के लिए सरदार बल्लभ भाई पटेल के योगदान से अवगत कराना था।

दरअसल, देश के प्रथम गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल की आजादी के बाद नए स्वतंत्र देश में राष्ट्रीय एकता के प्रति प्रतिबद्धता संपूर्ण और अडिग थी, जिससे उन्हें भारत का लौह पुरुष कहा जाता है।