बाल-बाल बच गई दुनिया वरना…

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रूस और यूक्रेन की लगातार चल रही जंग को अब नौ महीने हो चुके। पूरी दुनिया इस बात से परेशान है। हर शांतिप्रिय देश यही कोशिश कर रहा है कि पुतिन और जेलेंस्की आपस में बातचीत करें लेकिन यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की की ओर से वार्ता के लिए जिस तरह की शर्तें पेश की जा रही हैं, उनसे लगता नहीं है कि उन्हें अपनी अवाम की चिंता है।

जेलेंस्की खुद को हीरो साबित करने की कोशिश में पूरी दुनिया को ही जंग की आग में झोंकने की साजिश रचने लगे हैं। इस साजिश से रूस को भी सावधान रहने की जरूरत है। बात थोड़ी-सी बिगड़ी नहीं कि पूरी दुनिया ही संहार के रास्ते पर चल पड़ेगी।

दूसरे विश्वयुद्ध के बाद से ही दुनिया के तमाम देशों को परमाणु ताकत की चिंता सताने लगी थी। और इस कोशिश में कमोबेश हर छोटे-बड़े देश ने खुद की सुरक्षा के लिए अपना परमाणु कार्यक्रम शुरू किया। भारत भी इसमें पीछे नहीं रहा। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि ज्यादातर देशों के पास आज परमाणु बम की ताकत है- लेकिन उसे महज सुरक्षा-कवच या डिटरेंट फोर्स के तौर पर ही रखा गया है।

जंग आज भी पारंपरिक हथियारों के बूते ही लड़ी जा रही है। यह बात दीगर है कि रूस या चीन जैसे देश हमेशा दूसरों को एटम बम की धमकी दिया करते हैं। बहरहाल ताजा घटना में जिस तरह पोलैंड की सीमा में एक मिसाइल गिरी तथा उससे दो लोगों की मौत हुई, उस घटना को यूक्रेन ने विश्वयुद्ध का रूप देने की कोशिश की है। जी-20 की बाली में हो रही बैठक के बीच ही पोलैंड में कथित रूस के मिसाइल अटैक की बात जैलेंस्की ने फैला दी। इससे अमेरिका और नेटो में शामिल सभी देशों की त्यौरियां चढ़ गईं।

ज्ञातव्य है कि पोलैंड नेटो का सदस्य देश है और उत्तरी अटलांटिक संधि के तहत यह तय है कि नेटो के किसी भी सदस्य देश पर किया गया हमला सभी सदस्यों पर हमले के तौर पर देखा जाएगा। जेलेंस्की की साजिश कामयाब होती दिखने लगी थी। मगर तभी अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने पोलैंड में गिरी मिसाइल से रूस का संबंध होने से इंकार कर दिया। इससे पूरी दुनिया ने राहत की सांस ली है। खुद रूस ने भी दावा किया कि वह मिसाइल यूक्रेनी एयर डिफेंस सिस्टम की गलती से पोलैंड में जा गिरी।

नेटो के महासचिव तथा खुद पोलैंड के राष्ट्रपति ने भी उस मिसाइल को यूक्रेनी एयर डिफेंस सिस्टम से संबंधित बता दिया है। इससे विश्वयुद्ध की आशंका टली, लेकिन अगर जेलेंस्की अपनी साजिश में कामयाब हो जाते तो आज पूरी दुनिया का रूप कुछ अलग होता क्योंकि नेटो के प्रायः सभी बड़े सदस्यों के पास परमाणु शक्ति मौजूद है। ऐसे में पलटवार की संभावना बढ़ जाती और पूरी दुनिया जंग की आग में झुलस रही होती।

जेलेंस्की का चेहरा बेनकाब हुआ है। उनके झूठ की कलई खुली है। ऐसे बदहवास और बदनीयत लोगों के कारण दुनिया कभी भी खतरे में पड़ सकती है। विश्व विरादरी से अपील की जानी जाहिए कि जेलेंस्की जैसी सोच से परे रहकर रूस और यूक्रेन की हो रही जंग पर विराम लगाने का प्रयास किया जाय वरना एक झूठ के सहारे पूरा विश्व जलकर खाक हो सकता है।